Posts

Showing posts with the label मातृ वंदना कविता की व्याख्या

अभी न होगा मेरा अंत

Image
अभी न होगा मेरा अंत 1-अभी न होगा मेरा अन्त                          अभी-अभी ही तो आया है। मेरे जीवन में मृदुल वसंत अभी न होगा मेरा अन्त। हरे-हरे ये पति। डालियाँ कलियाँ कोमल गात! मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर फेसँगा निद्रित कलियों पर जगा एक प्रत्यूष मनोहर। व्याख्या-कवि घोषित कर रहा है कि अभी उसका साहित्य-सृजन थमने वाला नहीं है। अभी तो उसके कवि जीवन का आरम्भ ही हुआ है। जैसे वसंत ऋतु आने पर प्रकृति में उल्लास और उत्साह भरा वातावरण दिखाई देने लगता है, उसी प्रकार उसके जीवन का यह युवाकाल है। वह उत्साह से भरा हुआ है। अभी अंत के बारे में तो सोचना भी व्यर्थ है। कवि के मन और जीवन में हरियाली छाई हुई है। वह हरे-हरे कोमल शरीर वाले वृक्षों और पौधों को देखकर हर्षित हो रहा है। अपनी सपने जैसी कोमल कल्पनाओं द्वारा रचित काव्यरूपी हाथ को फेरकर वह आलस्य में पड़े जीवनों को जगाएगा। जैसे वसंत कलियों को खिलाता है, वह भी अपनी कविताओं से एक मनमोहक सवेरा लाएगा और अपने आस-पास स्थित अलसाये जीवनों में उत्साह जगाएगा। 2-पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच ...